नवरात्रि का शुभ आरम्भ हो चुका है जिस तरह नवरात्रि माँ के अलग अलग रूपों को निहारने का त्यौहार है जैसे कोई शिशु अपनी माँ के गर्भ में 9 महीने रहता है, वैसे ही हम अपने आप में परा प्रकृति में रहकर –ध्यान में मग्न होने का इन 9 दिनों का महत्व है| वहाँ से बाहर निकलते है तो सृजनात्मक का प्रस्सपुरण जीवन में आने लगता है| नवरात्रि में माँ की पूजा ध्यान कर हम अपनी आत्मा को विश्राम का समय देते है यह वह समय है जब हम खुद को सभी क्रियाओ से अलग कर देते है (जैसे खाना , बोलना आदि) और खुद में ही विश्राम करते है वास्तव नवरात्रि आनन्द, सुख और उत्साह का स्त्रोत है नवरात्रि के पहले दिन माँ शैलपुत्री पूजा ध्यान किया जाता है इस दिन कलश की स्थापना की जाती है पुराणों में कलश को भगवान गणेश का स्वरूप माना गया है इसलिए कलश की स्थापना पहले दिन कर दी जाती हैमाँ शैलपुत्री की आराधना से मनोवाछित फल और कन्याओं को उत्तम वर प्राप्ति होती है
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